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قال أمیرالمؤمنین علیه السلام
يُمتَحَنُ الرّجُلُ بفِعلِهِ لا بِقَولِهِ؛
غررالحكم، ح ۱۱۰۲۶
इमाम अली अ.स. ने फ़रमाया
मर्द अपने कर्म और किरदार से पहचाना जाता है सिर्फ अपनी बातों और गुफ्तगू से नहीं।
किरदार से पहचाना जाता है सिर्फ अपनी बातों और गुफ्तगू से नहीं।
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قال أمیرالمؤمنین علیه السلام
يُمتَحَنُ الرّجُلُ بفِعلِهِ لا بِقَولِهِ؛
غررالحكم، ح ۱۱۰۲۶
इमाम अली अ.स. ने फ़रमाया
मर्द अपने कर्म और किरदार से पहचाना जाता है सिर्फ अपनी बातों और गुफ्तगू से नहीं।